कविता संग्रह

कविता मेरा सपना

16 Posts

147 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12769 postid : 682662

एक प्रार्थना यमराज से

Posted On: 7 Jan, 2014 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

एक दिन एक आदमी जा पहुचा,

और यमराज को ढुढा गली और कुचा !

और काफी देर बाद उन्हे दिखा यमराज का घर,

जहा थे कुछ भैसे तथा यमदुत सो रहे बेखबर !

मैने जाकर उन्हे नीद से जागाया और उनसे पुछा यमराज कहा है,

उन्होने बताया कि वो वर्ल्ड टूर पर गये है !

फिर उन्होने कहा तुम यहा क्यो आये हो,

घर से भागे या भगाये गये हो !

पत्नी का मारा, किस्मत से बेसहारा, बेचारा,

मै छोङ आया हू वो जग सारा !

अब तो मै नही जिना चाहता इसिलिये यहां आया,

तो यमदुत ने पुछा क्या तुमने लायसेन्स है पास करवाया !

चित्रगुप्त ने देखा उसका लेखा जोखा और बतलाया……………..

अगले जन्म मे तुमने किये थे कुछ निच कर्म,

और तुम्हारे नरक मे आने का नही हुआ है अभी टर्म !

तब वह हठ करके वही बैठ गया और बोला,

जब तक नही आते यम मै बैठुंगा यही अकेला !

तब चित्रगुप्त ने यम को मिसकाल किया,

तब जवब मिला रोमिंग मे हू मिया !

अंत मे यम ने लौटने का फैसला किया,

और अगली ही फ्लाईट यमलोक के लिये लिया !

यमराज आये और उस व्यक्ति को बुलाये,

और कहा अपनी समस्या बताये !

मुझे अपनी पत्नी से बचने का कोई उपाय बताये,

नही तो मुझे या उसे अपने पास बुलायें !

इस शंकट का हल तो मुझे भी नही पता है,

तुमने शादी कि ये तुम्हारी सबसे बङी खता है !

अगर मुझे इस समस्या का हल पता होता,

तो मेरी भी एक बीबी और दो बच्चा होता !

इसीलिये तो मैने शादी नही की,

और यमलोक मे आबादी नही की !



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran