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कविता मेरा सपना

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हमें जीने दो

Posted On: 20 May, 2013 में

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एक महिला गर्भावस्था में थी ! लेकिन अचानक उसके घरवालो को पता चल गया की उसके पेट में एक बेटी है !
तो सभी मिलकर उसका गर्भपात करवाना चाहते है तो देखिये किस तरह से वो नन्ही सी जान उन सबसे अपने जीवन की भीख मांगती है ! मै कुछ लिखने की कोशिस कर रहा हूँ अगर कुछ गलतियाँ हो तो क्षमा प्रार्थी हूँ !

पापा ! पापा ! मुझे जीने दो
मुझे आने दो !
इस अदभुत दुनिया की
एक झलक तो पाने दो !!

मैंने क्या किया है बुरा
जो तुम चाहते हो मारना !
मै तो अभी आयी भी नहीं
और तुम चाहते हो मुझे निकालना !!

पापा आप जब ऑफिस से घर आयेंगे
थक हार कर चूर हो जायेंगे !
फिर मै आपको पापा बुलाऊँगी
आप सारी थकान भूल जायेंगे !!

मै बिलकुल भी जिद ना करूंगी
आप सब से डरूँगी !
बड़े प्यार से रहूँगी
कभी गुस्सा ना करूंगी !!

लेकिन हम तो एक बच्चा चाहते थे
लड़का होनहार और सच्चा चाहते थे !
जो हमें चारो धाम की यात्रा और सेवा करेगा
हम तो लडके के रूप में लाटरी चाहते थे !!

तेरी शादी मै कैसे करूंगा
बैंक का कर्ज मई कैसे भरूंगा !
मेरी नौकरी भी चली जायेगी
मई तेरी परवरिश कैसे करूंगा !!

पापा ! मई नौकरी करूंगी
किसी के घर झाड़ू बर्तन ही करूंगी !
और धीरे-धीरे करके
सभी कर्ज भरूँगी !!

आप सब की दिन-रात सेवा करूंगी
आपके बुढ़ापे का सहारा बनूंगी !
मुझे आने दीजिये
मै आप सब की आंखो का तारा बनूंगी !!

फिर वो माँ से प्रार्थना करती है

माँ तू तो माँ है
फिर तू ऐसा कैसे करेगी !
क्या तू अपनी इस
नन्ही सी जान को कुचल सकेगी !!

जिस नन्ही सी जान को
नौ महीने पाला !
उस सुकुमार, कोमल
कुसुम को इन हाथो से मसल सकेगी !!

आपने मेरे लिए
न जाने कितने सपने सजोयें थे !
सारी- सारी रात
बिना खाए पिए सोयी थे !!

लेकिन उसकी इन मिन्नतो का माँ पर कोई असर नहीं होता है .
फिर वो अपने दादा-दादी से कहती है

आपकी गोद में बैठ कर खेलूंगी
आपसे अठखेलिया करूंगी !
आपसे कहानियां सुनूंगी
आपसे तरह-तरह की पहेलियाँ करूंगी !!

दादा-दादी का जवाब बड़ा हे निर्मम आया .

तुम न जाने किस घड़ी में आयी
आते ही मेरे घर में तबाही मचाई !
हम कब से इस पल का इंतज़ार कर रहे थे
तूने ही हमारे जीवन में आग लगाई !!



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47 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jagojagobharat के द्वारा
February 3, 2015

आपकी रचना ने भावुक कर दिया

Madan Mohan saxena के द्वारा
May 30, 2013

Nice sharing. very Beautiful. Keep it up. Plz visit my blog.

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 30, 2013

    thanks for your beautiful compliment. I`ll certainly visit on your blog. thanks

aman kumar के द्वारा
May 29, 2013

माँ तू तो माँ है फिर तू ऐसा कैसे करेगी ! क्या तू अपनी इस नन्ही सी जान को कुचल सकेगी !! माँ भी मजबूर हो जाती है ………..उसका अपना जीवन दाव पर लगा होता है ……. समसमायिक मुद्दो को जिन्दा रखना ……. आप सच्चे लेखक है …….

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 30, 2013

    शुक्रिया अमन कुमार जी आपने अपने निर्मल वचनों से मेरा जो प्रोत्साहन किया है मै उसके लिए तहे दिल से आभारी हूँ. शुक्रिया

Alka के द्वारा
May 29, 2013

ऋषभ जी, आपकी रचना ने भावुक कर दिया | अभी भी कई लोग बेटियों को भर समझते है | जो गलत है | सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए बधाई ….

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 30, 2013

    शुक्रिया अलका जी आपके इस वचन के लिए आपका आभार

yamunapathak के द्वारा
May 27, 2013

रिषभ यह बहुत ही मार्मिक कविता है.ऐसा करने वाले भूल जाते हैं की इंदिरा भी अपने मत पिता की बेटी के रूप में एक संतान थी.सब अपनी तकदीर लेकर आती हैं . साभार

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 27, 2013

    जी यमुना जी सही कहा अपने लोग की सोच बहूत ही संकीर्ण हो चुकी है, हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

Sushma Gupta के द्वारा
May 27, 2013

ऋषभ जी नमस्कार , वेटियों का दर्द ,एवं परिजनों की उपेक्षा की सदिओं से चली आ रही इस कहानी को आपने अपनी इस सुन्दर रचना में बहुत ही मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया है, जिसके लिए साभार वधाई ..मेरे ब्लॉग पर आने का समय निकालिएगा ..

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 27, 2013

    सुक्रिया सुषमा जी , मै जरूर आऊंगा, हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

yogi sarswat के द्वारा
May 27, 2013

जो तुम चाहते हो मारना ! मै तो अभी आयी भी नहीं और तुम चाहते हो मुझे निकालना !! पापा आप जब ऑफिस से घर आयेंगे थक हार कर चूर हो जायेंगे ! फिर मै आपको पापा बुलाऊँगी आप सारी थकान भूल जायेंगे !! मै बिलकुल भी जिद ना करूंगी आप सब से डरूँगी ! बड़े प्यार से रहूँगी कभी गुस्सा ना करूंगी आँखें भर आयीं मित्र आपके शब्द पढ़कर ! लेकिन रोज़ रोज़ के बलात्कार के किस्से सुनकर तो कभी कभी लगता है , लड़कियां इस युग में कैसे जीयेंगी ? बहुत मार्मिक शब्द

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 27, 2013

    शुक्रिया योगी सारस्वत जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

Manisha Singh Raghav के द्वारा
May 26, 2013

ऋषभ जी मैंने आपके लेख ” हमें जीने दो ” पर कमेंट भेजा था । उसमें आपने लिखा था कि अगर हर कोई आपकी तरह सोचने लगे तो स्रष्टि खत्म हो जाएगी । ऋषभ जी इसके एवज में आपको एक वाक्या सुनाती हूँ —- जब मैं युवा हो रही थी और जब मेरी माँ मुझ पर किसी चीज की पाबंदी लगाती और मैं उसका विरोध करती तो मेरी माँ एक बात जरुर कहती कि ” अभी तुझे पता नहीं चल रहा तुझे जब मालूम होगा जब तू माँ बनेंगी ” । उस वक्त तो मैं उनकी बातें हवा में उड़ा दिया करती थी लेकिन अब जब मैं एक बेटी की माँ बनी हूँ और मेरी बेटी भी उसी मोड़ पर खड़ी है अब पता चलता है माँ की चिंता की वजह ।ऐसी चिंता सिर्फ मेरी ही नहीं आज हर उस माँ की है जिसने बेटी को जन्म दिया है । यह सच है कि लडकियों ने हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम किया है । यहाँ बात युवा लडकी की नहीं हो रही है बात नाबालिग लडकी की हो रही है जो बेचारी अपनी रक्षा तक करना नहीं जानतीं और सबसे बड़ी बात जनता भी चीख चिल्लाकर चुप बैठ जाती है और सरकार आँख कान बंद किये बैठी है फिर भी इन केसों में कोई कमी नहीं आ रही और सबसे बड़ी बिडम्बना यह है कि ऐसे केस आजकल ज्यादातर गाँव में हो रहे हैं । सभी अख़बार पढ़ते हैं और मोडकर रख देते हैं ।

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 27, 2013

    मनीषा जी सबसे पहले तो शुक्रिया, और मैंने अप की उस बात का बिरोध किया था जिसमे आपने महिलाओ के इस पृथ्वी पर ना आने की बात कही थी, मई आपके इस बात से पूर्ण रूप से सहमत हूँ की आये दिन हर रोज महिलाओ से अत्याचार हो रहा है, और आपके इस दर से तो आज हर बेटी की माँ ग्रषित है लेकिन हमें महिलाओ के प्रति अपनी सोच को बदलनी ही होगी, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब देश में बेटियों का अकाल पड़ जाएगा. इसीलिए मई सभ इसे यह आह्वान करता हूँ की अब भी जग जाओ और बेटी को बचाओ. हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

Women Empowerment के द्वारा
May 23, 2013

बहुत ही मार्मिक कविता है..पर सच है यह आज भी कई भारतीय परिवारों की सच्चाई है..लेकिन अब कुछ सुखद पहलू भी सामने आने लगे हैं जिसे जानकर खुशी और गर्व का अनुभव होता है..इस लिंक को पढ़कर उम्मीद है आपको भी खुशी होगी… http://womenempowerment.jagranjunction.com/2013/03/26/%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AA-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%9F/

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया जी, मैंने पहले ही पढ़ राखी है .

priti के द्वारा
May 22, 2013

सुंदर और भावपूर्ण रचना…….बधाई ! रिषभ जी …..

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया प्रीती , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

Manisha Singh Raghav के द्वारा
May 22, 2013

ऋषभ शुक्ला जी आपने ” हमें जीने दो ” बहुत अच्छी कविता लिखी है पर माफ़ करियेगा कि आजकल जो हवा चल रही है ( नाबालिक बच्चियों से दुष्कर्म ) उस जगह आपकी कविता का टाइटिल फिट होता है पहले तो उस परेशानी का हल निकला जाये फिर लडकी को दुनिया में लाने का सोचा जाये । जब तक इस भारत में बच्चियों के साथ दुष्कर्म जैसे अपराधों पर अंकुश नहीं लग जाता तब तक कन्या का ऐसे मनहूस देश में पैदा न होना ही अच्छा है । बस यही कह सकती हूँ —- ना आना इस देश मेरी लाडो ” ।

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    मनीषा जी शायद आप यह भूल रही है की लड़कियों के साथ कुछ बुरा जरूर हो रहा है लेकिन इसके साथ -साथ वे विकास के हर क्षेत्र में सफलता भी पा रही है. और अगर हम सभी भी आप की तरह सोचने लगे तब तो यह सृष्टी भी ख़त्म हो जायेगी. शुक्रिया प्रीती , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

bharodiya के द्वारा
May 22, 2013

ऋषभ, एक बरगद का पेड है । पानी काम मिल रहा है । नई टेहनी, नयी पत्ती उगने पर पूरानी टहनी और पत्ते दहल जाते हैं । सोचते हैं हमे ही पानी नही मिल रहा और ये नये पत्ते ? क्या होगा हमारा ? स्वार्थ नवजिवन को ही रोंदना चाहता है ।

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया भरोदिया जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

laxmikadyan के द्वारा
May 21, 2013

बहुत ही सुन्दर और दिल को छुने वाली बात लिखी हे आप ने सही लिखा हे हर कन्या को हक़ हे धरती पर आने का और हर मात पिता का फर्ज हे उसे इस धरती पर लाने का जय भगवान सिंह कादयान

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया लक्ष्मी जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
May 21, 2013

बहुत सुन्दर कबिता / बधाई /

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया राजेश जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
May 21, 2013

शुक्ल जी ,कविता के माध्यम से एक गर्भस्थ लड़की की व्यथा का सुन्दर चित्रण किया है.धन्यवाद

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया सत्य शील जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

rishabh786 के द्वारा
May 21, 2013

बहूत ही सुन्दर रचना ऋषभ शुक्ला जी ,बहूत – बहूत बधाई,

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया रिषभ जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

jagojagobharat के द्वारा
May 21, 2013

बहुत सुन्दर रचना …..बधाई

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया, हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

roshni के द्वारा
May 21, 2013

बहुत मार्मिक रचना … ऐसे ही लिखते रहिये

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया रोशनी जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

anoopkumarmishra के द्वारा
May 21, 2013

Good effort, Gist of your poem should be disseminated to all family members who possess backward mentality.

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया अनूप जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 20, 2013

भाव पूर्ण रचना आने दो बेटी को जरूर आने दो बधाई

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया प्रदीप जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

Sumit के द्वारा
May 20, 2013

सुंदर रचना …..ऐसे ही लिखते रहे http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2013/05/20/ग़ज़ल/

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया सुमित जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

sudhajaiswal के द्वारा
May 20, 2013

ऋषभ जी, सुन्दरता और बुद्धिमता का अनोखा संगम हैं बेटियां, अच्छी मार्मिक रचना के लिए बधाई |

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया सुधा जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

prsntkmr के द्वारा
May 20, 2013

bahut achhi poems likhate ho bhai ye wali padake to dil bhar aaya

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया प्रशांत जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.

bhagwanbabu के द्वारा
May 20, 2013

निश्छ्ल… और अंजाने प्रेम का ये शब्द… अच्छा लगा…

    ऋषभ शुक्ला के द्वारा
    May 23, 2013

    शुक्रिया भगवान बाबु जी , हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आप सभी आगे भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे, शुक्रिया.


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