कविता संग्रह

कविता मेरा सपना

16 Posts

147 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12769 postid : 21

हम कैसे जिये

Posted On: 20 May, 2013 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हम इस दुनिया में कैसे जिये,
जहा हर है तरफ है झूठ और मक्कारी !
जहा हमें बेबस , लाचार और मुर्ख,
समझती है ये दुनिया सारी !!
हम इस दुनिया में कैसे जिए ,
अपनी खुशियों का पजामा कैसे सिये !
हो गयी है जिन्दगी मेरी जहर ,
इस कड़वे से सच को कैसे पीये !!
रोज-रोज मरता रहु इसलिए की ,
कल सवेरा मेरी अंतिम शाम न बने !
हर समय लगता है डर इस बात का ,
कही हमारा भी उन जैसा अंजाम न बने !!



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran