कविता संग्रह

कविता मेरा सपना

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ऋषभ शुक्ला


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माँ ………..तेरे जाने के बाद

Posted On: 7 Jan, 2015  
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Hindi Sahitya कविता हास्य व्यंग में

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मैंने भी प्यार किया था

Posted On: 4 Nov, 2014  
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Hindi Sahitya में

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आज का प्रेम

Posted On: 12 Apr, 2014  
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Hindi Sahitya Others कविता में

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एक प्रार्थना यमराज से

Posted On: 7 Jan, 2014  
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Hindi Sahitya Junction Forum कविता में

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पापा मेरी भी शादी करवा दो

Posted On: 10 Aug, 2013  
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Celebrity Writer Hindi Sahitya Junction Forum Others में

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टीवी और मेरा बचपन

Posted On: 30 Jul, 2013  
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Celebrity Writer Entertainment Hindi Sahitya Junction Forum में

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हमें जीने दो

Posted On: 20 May, 2013  
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हम कैसे जिये

Posted On: 20 May, 2013  
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मेरा परिचय

Posted On: 16 May, 2013  
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माँ

Posted On: 9 May, 2013  
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पार्टी मे जाने के नियम

Posted On: 8 May, 2013  
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गीत

Posted On: 7 May, 2013  
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Others sports mail टेक्नोलोजी टी टी न्यूज़ बर्थ में

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नारी (एक बेबसी)

Posted On: 16 Feb, 2013  
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Others sports mail टेक्नोलोजी टी टी न्यूज़ बर्थ में

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माँ

Posted On: 14 Feb, 2013  
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Others मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

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भ्रष्टाचार

Posted On: 4 Jan, 2013  
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Others मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

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बचपन

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ऋषभ जी मैंने आपके लेख '' हमें जीने दो '' पर कमेंट भेजा था । उसमें आपने लिखा था कि अगर हर कोई आपकी तरह सोचने लगे तो स्रष्टि खत्म हो जाएगी । ऋषभ जी इसके एवज में आपको एक वाक्या सुनाती हूँ ---- जब मैं युवा हो रही थी और जब मेरी माँ मुझ पर किसी चीज की पाबंदी लगाती और मैं उसका विरोध करती तो मेरी माँ एक बात जरुर कहती कि '' अभी तुझे पता नहीं चल रहा तुझे जब मालूम होगा जब तू माँ बनेंगी '' । उस वक्त तो मैं उनकी बातें हवा में उड़ा दिया करती थी लेकिन अब जब मैं एक बेटी की माँ बनी हूँ और मेरी बेटी भी उसी मोड़ पर खड़ी है अब पता चलता है माँ की चिंता की वजह ।ऐसी चिंता सिर्फ मेरी ही नहीं आज हर उस माँ की है जिसने बेटी को जन्म दिया है । यह सच है कि लडकियों ने हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम किया है । यहाँ बात युवा लडकी की नहीं हो रही है बात नाबालिग लडकी की हो रही है जो बेचारी अपनी रक्षा तक करना नहीं जानतीं और सबसे बड़ी बात जनता भी चीख चिल्लाकर चुप बैठ जाती है और सरकार आँख कान बंद किये बैठी है फिर भी इन केसों में कोई कमी नहीं आ रही और सबसे बड़ी बिडम्बना यह है कि ऐसे केस आजकल ज्यादातर गाँव में हो रहे हैं । सभी अख़बार पढ़ते हैं और मोडकर रख देते हैं ।

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